'रिवेंज बेडटाइम प्रोक्रेस्टिनेशन': रात को देर तक जागकर आप किससे बदला ले रहे हैं?
क्या आप थके होने के बावजूद सिर्फ 'आज़ादी' महसूस करने के लिए देर रात तक फोन चलाते हैं? जानिए इस आदत के पीछे का मनोविज्ञान और इसे तोड़ने के तरीके।
रात के 1 बज रहे हैं। आपकी आंखें जल रही हैं, शरीर थका हुआ है, फिर भी आप वीडियो देख रहे हैं या सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे हैं। आप जानते हैं कि सुबह पछतावा होगा, लेकिन आप रुक नहीं पा रहे। यह अनिद्रा (Insomnia) नहीं है; इसे मनोवैज्ञानिक 'रिवेंज बेडटाइम प्रोक्रेस्टिनेशन' (Revenge Bedtime Procrastination) कहते हैं। यह तब होता है जब लोग अपने दिन पर नियंत्रण न होने के कारण, रात में जबरदस्ती जागकर अपनी 'आज़ादी' वापस पाने की कोशिश करते हैं।
इसके पीछे का मनोविज्ञान 'समय वापस छीनने' का है। अगर आपका पूरा दिन बॉस के लिए काम करने, पढ़ाई करने या घर की जिम्मेदारियों में निकल जाता है, तो आपके दिमाग को लगता है कि उसने *खुद* के लिए कुछ नहीं किया। इसलिए, यह आपकी नींद से 'बदला' लेता है। आप इसलिए नहीं जाग रहे क्योंकि नींद नहीं आ रही, बल्कि इसलिए कि रात ही वह समय है जब कोई आपसे कुछ नहीं मांगता। यह आपका 'Me Time' होता है।
इस चक्र को तोड़ने के लिए जबरदस्ती सोने की कोशिश न करें, बल्कि दिन के समय अपने लिए थोड़ा वक्त निकालें। दोपहर में सिर्फ 15 मिनट अपनी पसंद का काम करने से रात को देर तक जागने की तलब कम हो सकती है। इसके अलावा, एक 'डिजिटल सनसेट (Digital Sunset)' अलार्म सेट करें—जैसे रात 10 बजे के बाद कोई स्क्रीन नहीं, जो दिमाग को संकेत देगा कि दिन अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।